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छत्रपति शिवाजी : एक महान योद्धा

छत्रपति शिवाजी

शिवा जी

जन्म – 10 अप्रैल 1627 को शिवनेर के दुर्ग में।
दुर्ग की ईष्ट देवी ‘ शिवनेरी देवी ‘ के नाम पर इनका नाम शिवाजी रखा गया।

वंश भोंसले वंश

आदि पूर्वज –

शिवाजी के आदि पूर्वज मेवाड़ राज्य के सिसोदिया वंश से संबंधित थे।

माना जाता है कि 1303 ईस्वी में जब अलाउद्दीन खिलजी ने मेवाड़ पर आक्रमण किया , तब सज्जन सिंह मेवाड़ से महाराष्ट्र चले गए |
इन्हीं की पांचवी पीढ़ी के वशंज उग्रसेन थे,जिनके दो पुत्र कर्ण सिंह और शुभकरण थे इन्ही शुभकरण के वंशज भोंसले कहलाए।

पिता – इनके पिता शाहजी भोंसले थे, शाहजी के पास पूना तथा बंगलौर की जागीर थी, पूना की जागीर शिवाजी को सौंपकर शाहजी ने स्वयं बीजापुर रियासत में नौकरी की थी ।

माता – शिवाजी की माता जीजाबाई लाखूजी जाधवराव ( देवगिरी के यादवों के वंशज) की पुत्री थी।

शिवाजी का पाल पोषण माता जीजाबाई तथा शिवाजी के संरक्षक दादाजी कोंडदेव(शाहजी के मित्र) ने पूना में किया।

विवाह- शिवाजी का प्रथम विवाह ‘साईबाई निम्बालकर ‘ के साथ 1640 में हुआ।

शिवाजी के आचरण पर उनके आध्यात्मिक गुरु ‘ समर्थ रामदास ‘ का अत्यधिक प्रभाव पड़ा।

शिवाजी के बड़े भाई ‘ शम्भाजी ‘ थे, वर्ष 1654 में पोलीगर में अप्पा खां से युद्ध लड़ते हुए शम्भाजी मृत्यु को प्राप्त हुए।

वर्ष 1645 में शिवाजी ने रायरेश्वर महादेव मंदिर(रायरी पहाड़ी पर ) में दादाजी पंत को साक्षी मान हिंद स्वराज की स्थापना की शपथ ली।

शिवाजी ने अपने शुरुवाती सैनिक अभियान बीजापुर के आदिलशाही वंश के विरुद्ध किए तथा 1646 में ‘ तोरण के पहाड़ी दुर्ग ‘ पर अधिकार कर लिया, इसी के साथ सिंहगढ़, राजगढ़, कोंडाना जैसे किलों को जीता।

1654 में शिवाजी ने ‘ पुरंदर के किले ‘ को जीतकर मराठा संघ को और अधिक शक्तिशाली बनाया।

1656 में ‘ जावली ‘ तथा‘ जुन्नार ‘ के किले की विजय की ।

शिवाजी ने 1656 में ‘ रायगढ़’ को अपनी राजधानी घोषित किया।

1657 में शिवाजी का पहली बार मुगलों से मुकाबला हुआ जब शिवाजी ने अहमदनगर और जुन्नार पर आक्रमण किया।


शिवाजी का अफजल खां से संघर्ष –

बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी का दमन करने के लिए अपने सेनापति अफजल खां को भेजा। अफजल खां ने शिवाजी की हत्या का षड्यंत्र रचा और शिवाजी के पास अपने दूत कृष्ण जी भास्कर को भेजकर वार्ता करने की इच्छा जाहिर की।

वार्ता करने के लिए अफजल खां ने शिवाजी को प्रतापगढ़ के जंगलों में बुलाया परंतु शिवाजी अफजल की कूटनीति को पहचान गए तथा मराठा सैनिकों को जंगल में छिपे रहने को कहा।

अफजल ने गले मिलने के बहाने शिवाजी की हत्या का प्रयास किया, परंतु शिवाजी ने अपने बघनख से अफजल खां की हत्या कर दी ।


शिवाजी का शाइस्ता खां से संघर्ष-

1660 में औरंगजेब ने शाइस्ता खां ( औरंगजेब का मामा) को दक्षिण का सूबेदार नियुक्त किया तथा शिवाजी का दमन करने का आदेश दिया

शाइस्ता ने बीजापुर के सुल्तान के साथ हाथ मिलाया तथा शिवाजी के कुछ क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया परंतु शिवाजी ने युद्ध जारी रखा तथा 15 अप्रैल 1663 में रात्रि के समय शिवाजी ने पुणे में शाइस्ता खां के शिविर में आक्रमण किया।

इस आक्रमण में शाइस्ता खां घायल हुआ तथा उसका बेटा फतेह खां मारा गया।


शिवाजी तथा राजा जयसिंह के मध्य संघर्ष –

शाइस्ता खां के पश्चात औरंगजेब ने कछवाहा राजपूत राजा जयसिंह को शिवाजी के विरुद्ध अभियान में भेजा।
जय सिंह ने शिवाजी के साथ संघर्ष किया तथा शिवाजी को संधि करने के लिए बाध्य किया 3 दिनों तक चली वार्ता के बाद पुरंदर की संधि हुई।


पुरंदर की संधि (22 जून 1665)-

यह संधि शिवाजी तथा राजा जयसिंह के मध्य हुई थी।

संधि के निश्चित हुई शर्ते –

1-शिवाजी ने 35 किलों में से 23 किले मुगलों को दे दिए।

2-औरंगजेब ने शिवाजी के पुत्र संभाजी को मुगल दरबार में 5000 का मनसब प्रदान किया।


औरंगजेब की कैद में शिवाजी –

जयसिंह के कहने पर शिवाजी 12 मई 1666 को औरंगजेब से मिलने के लिए आगरा के दरबार में पहुंचे, जहां दरबार में मुगलों द्वारा शिवाजी के साथ बदसलूकी की गई तथा औरंगजेब द्वारा मराठों को चूहा कहा गया।

मुगलों के इस बर्ताव से शिवाजी नाराज हुए तथा विद्रोह कर दिया परिणामस्वरुप शिवाजी को आगरा में स्थित जयपुर महल में बंदी बना लिया गया ।

परंतु शिवाजी ने अपनी चतुराई का परिचय देते हुए 18 अगस्त 1666 में अपने हमशक्ल हिरोजी फर्जंद को अपनी जगह रखकर फूलों तथा मिठाई की टोकरी में छुपकर कैद से भाग निकले। 12 सितम्बर 1666 को शिवाजी रायगढ़ पहुंचे।


सूरत की लूट –

शिवाजी ने सूरत को दो बार लूटा

सूरत की पहली लूट -( 8 जनवरी 1664)

सूरत की इस लूट में शिवाजी को लगभग 1 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई।

सूरत की दूसरी लूट -(1670)

सूरत की इस लूट में शिवाजी को 66 लाख की धनराशि तथा औरंगजेब के लिए तैयार की गई सोने की पालकी भी प्राप्त हुई।


शिवाजी का राज्याभिषेक ( 6 जून 1674)

शिवाजी ने 5 जून 1674 को रायगढ़ में अपना राज्याभिषेक करवाया, शिवाजी का राज्याभिषेक काशी के प्रसिद्ध विद्वान विश्वेश्वर भट्ट (गंगाभट्ट) ने किया जो महाराष्ट्र का एक प्रसिद्ध ब्राह्मण थे तथा लंबे समय से काशी में रह रहे थे।

अपने राज्याभिषेक में शिवाजी ने यज्ञोपवीत संस्कार, तुलादान तथा अपनी दूसरी पत्नी ‘सोयराबाई’ के साथ पुनः विवाह भी किया। शिवाजी ने राज्याभिषेक के इस अवसर पर एक नया संवत चलाया तथा स्वयं छत्रपति की उपाधि धारण की।

Note – हेनरी ऑक्साइडन भी शिवाजी के राज्याभिषेक में उपस्थित था।

शिवाजी का दूसरा राज्याभिषेक

माता जीजाबाई की मृत्यु होने पर 24 सितम्बर 1674 में शिवाजी ने तांत्रिक विधि से अपना दूसरा राज्याभिषेक करवाया।
इस राज्याभिषेक को ‘निश्चलपुरी गोसाईं’ नामक तांत्रिक ने संपन्न करवाया।


कर्नाटक अभियान (1676 -1678)

यह अभियान शिवाजी का अंतिम अभियान था ।

जिंजी की विजय शिवाजी द्वारा प्राप्त अंतिम विजय थी।

मृत्यु – 3 अप्रैल 1680 में शिवाजी की अत्यधिक ज्वर आने के कारण मृत्यु हो गई।

शिवाजी का अंतिम संस्कार उनके छोटे बेटे ‘ राजाराम ‘ ने किया, इसी के साथ शिवाजी की 7 पत्नियों में से ‘ पुतलीबाई’ शिवाजी के साथ सती हुई।

 

दोस्तों hindlogy की आगामी post में शिवाजी के प्रशासन , सैन्य व्यवस्था तथा भू राजस्व व्यवस्था आदि पहलुओं के विषय में जानकारी दी जाएगी।

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