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MAHASAGAR -MAHASAGAR KISE KAHTE HAIN ?-महासागरों के नाम व उनके बारे में : HINDLOGY

महासागरों के नाम व उनके बारे में



MAHASAGAR

सम्पूर्ण पृथ्वी के 3/4 भाग में जलमंडल का विस्तार है।
जल मण्डल का अधिकतम विस्तार दक्षिणी ध्रुव पर है।
दक्षिणी ध्रुव पर जलमंडल का विस्तार 80.9% है, जबकि
उत्तरी ध्रुव पर इसका विस्तार 60.7% है।
पृथ्वी पर उपलब्ध जल का कुल 97.5% भाग महासागरीय जल का है, जो कि खारा है जबकि केवल 2.5% भाग ही स्वच्छ जल के रूप में उपलब्ध है।

विश्व की लगभग 98 प्रतिशत जलराशी सागरों में है जबकि ,
लगभग 2 प्रतिशत नदियों, झीलों, भूमि के अंदर तथा मिट्टी में उपस्थित है।
सम्पूर्ण पृथ्वी का अधिकतर भाग जल से घिरा है इसलिए पृथ्वी को ‘जल ग्रह’ भी कहा जाता है।
जल के कारण ही पृथ्वी पर जीवन सम्भव हो सका है ।

महासागर ( Ocean ) किसे कहते हैं : MAHASAGAR KISE KAHTE HAIN ?
WHAT IS OCEAN ?

जलमंडल का वह बड़ा भाग जिसकी कोई निश्चित सीमा न हो महासागर कहलाता है , प्रमुख महासागरों के नाम निम्नलिखित हैं :

1 –प्रशान्त महासागर (Pacific Ocean)
2 –अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean)
3 –हिन्द महासागर (Indian Ocean)
4 –आर्कटिक महासागर या उत्तरी ध्रुव महासागर ( Arctic Ocean )
5 –अंटार्कटिक महासागर या दक्षिण ध्रुव महासागर ( Southern Ocean)

प्रशान्त महासागर : PRASHANT MAHASAGAR (Pacific Ocean)

  • पृथ्वी का सबसे बड़ा महासगार प्रशांत महासगार है
  • यह पृथ्वी के लगभग एक तिहाई क्षेत्रफल पर विस्तृत है,
  • कुल क्षेत्रफल -16,62,40,000 वर्ग किलोमीटर है।
    प्रशांत महासागर का क्षेत्रफल सभी पृथ्वी पर स्थित सम्पूर्ण स्थल भाग के क्षेत्रफल से भी अधिक है।
    यह महासागर पृथ्वी के सम्पूर्ण क्षेत्रफल के लगभग 32% भाग पर और जल क्षेत्र के लगभग 46% भाग पर फैला हुआ है।
  • प्रशांत महासागर के ,
    पूर्व में उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका,
    पश्चिम में एशिया व ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप
    उत्तर में बेरिंग जलडमरूमध्य,
    तथा दक्षिण में अंटार्कटिका महाद्वीप तथा और द्वीप समूहों की एक लंबी श्रृंखला है
  • आकृति में प्रशांत महासागर लगभग त्रिभुजाकर है,
    जो पूर्व से पश्चिम तक लगभग 19800 किमी. की चौड़ाई में और उत्तर से दक्षिण तक लगभग 15500 किमी. की लंबाई में फैला हुआ है।
  • प्रशांत महासागर विश्व का सबसे अधिक गहरा महासागर है।
    इसकी की औसत गहराई लगभग 4200 मी. तक है।
    विश्व का सबसे गहरा गर्त मेरियाना ट्रेंच/गर्त भी प्रशांत महासागर में पाया जाता है। मेरियाना ट्रेंच में स्थित चैलेंजर डीप की गहराई लगभग 11022 मी. तक है।
  • प्रशांत महासागर का उत्तरी भाग सबसे अधिक गहरा है। उत्तरी भाग की औसत गहराई 5000 मी. से 6000 मी. तक है।
    इन प्रमुख गर्तों की औसतन लगभग गहराई 7000 मी. से 10000 मी. तक है।
  • भूमध्य रेखा प्रशांत महासागर को दो भागों में विभाजित करती है – उत्तरी प्रशांत महासागर और दक्षिणी प्रशांत महासागर
  • विश्व की सबसे बड़ी प्रवाल भित्ति ग्रेट बैरियर रीफ प्रशांत महासागर में ही स्थित है। यह प्रवाल भित्ति ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के पास 1200 मील तक फैली हुई है।

द रिंग ऑफ़ फायर ( THE RING OF FIRE )

द रिंग ऑफ़ फायर ( THE RING OF FIRE )

द रिंग ऑफ़ फायर ( THE RING OF FIRE )

 

  • प्रशांत महासागर में 450 से अधिक ज्वालामुखियों का समूह है ,
    जिनमें दुनिया के चार सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से तीन –
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में माउंट सेंट हेलेंस (Mount St. Helens),
  • जापान में माउंट फ़ूजी (Mount Fuji)
  • फिलीपींस में माउंट पिनाटूबो (Mount Pinatubo) शामिल हैं।
  • द रिंग ऑफ़ फायर को कभी-कभी परिधि-प्रशांत बेल्ट (circum-Pacific belt) भी कहा जाता है।
  • विश्व के लगभग 90% भूकंप और 80% सबसे बड़े (लंबे) भूकंप रिंग ऑफ फायर में आते हैं,

प्रशांत महासागर ( PRASHANT MAHASAGAR ) का “प्रशांत “नाम पुर्तगाल के रहने वाले यात्री मैगलन ने रखा था। मैगलन ने पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले विश्व के पहले दल का नेतृत्व किया था। यह दल जब तूफानी और अत्यधिक शोरगुल वाले अटलांटिक महासागर को पार करके प्रशांत महासागर में आया,
तो मैगलन और उनके साथियों को इस महासागर का जल अटलांटिक महासागर की तुलना में काफी शांत लगा इस वजह से इसका नाम प्रशांत महासागर पड़ा।

अटलांटिक महासागर :  (Atlantic Ocean)

  • अटलांटिक महासागर ( ATLANTIC MAHASAGAR ) विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महासागर है,
    आकार में यह महासागर प्रशांत महासागर का लगभग आधा है और संसार के लगभग पांचवें भाग के बराबर है।
  • विश्व की कई बड़ी नदियां जैसे – अमेज़न नदी, मिसिसिपी, कांगो, नाइजर नदी आदि अटलांटिक महासागर महासागर में गिरती हैं।
    इसलिए इस महासागर को “प्यासा महासागर” के नाम से भी जाना जाता है।
  • अटलांटिक महासागर को अंध महासागर भी कहा जाता है।
  • इस महासागर का कुल क्षेत्रफल 10,64,60,000 वर्ग किमी. है
    इसकी औसत गहराई लगभग 3646 मी. है।
  • अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा स्थान प्यूर्तो रिको ट्रेंच है,
    जिसमे स्थित मिल्वाैकी डीप की गहराई लगभग 8376 मी. है।
  • अटलांटिक महासागर की आकृति अंग्रेजी के ‘S’ अक्षर से मिलता जुलती है।
  • अटलांटिक महासागर के
    पूर्व में यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप और ,
    पश्चिम में उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप स्थित हैं।
    यह महासागर उत्तर में ग्रीनलैंड, आइसलैंड तथा अन्य छोटे द्वीपों से घिरा हुआ है,
    जबकि इसके दक्षिण में अंटार्कटिका महाद्वीप स्थित है
  • भूमध्य रेखा के समीप स्थित “रोमांश गर्त” अटलांटिक महासागर को दो भागों में विभाजित करता है।
    इसका उत्तरी भाग “डॉल्फिन श्रेणी” और दक्षिणी भाग “चैलेंजर कटक” कहलाता है।
  • अटलांटिक महासागर के दक्षिणी भाग में बरमूडा जैसे प्रवाल द्वीप स्थित हैं,
    तथा ट्रिस्ता दी कन्हा, सेंट हेलेना, असेंसन, गुआ और बोवेट द्वीप जैसे अनेक ज्वालामुखीय द्वीप भी इसी भाग पर स्थित हैं।
  • सभी महासागरों में अटलांटिक महासागर की तटरेखा की लंबाई सबसे अधिक है
    इसका कारण है इस महासागर की तटरेखा का बहुत कटा – फटा होना ।
  • 55° उत्तरी अक्षांश के पास अटलांटिक महासागर बहुत अधिक चौड़ा हो जाता है। जहां इसे टेलीग्राफिक पठार के नाम से जाना जाता है।
  • विश्व का सबसे अधिक व्यस्त महासागर अटलांटिक महासागर है।

हिन्द महासागर :  (Indian Ocean)

  • विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर, हिन्द महासागर ( HIND MAHASAGAR ) है।
    इस महासागर का कुल क्षेत्रफल लगभग 7,05,60,000 वर्ग किमी है।
  • हिन्द महासागर के ,
    पूर्व में ऑस्ट्रेलिया तथा पश्चिम में अफ्रीका और इंडोनेशिया की द्वीप श्रंखला स्थित है।
    जबकि दक्षिण में यह अंटार्कटिका महाद्वीप तक विस्तृत है।
    हिन्द महासागर उत्तर में एशिया महाद्वीप से पूरी तरह से घिरा हुआ है।
    इसलिए इसे अर्द्ध सागर भी माना जा सकता है।
    हिन्द महासागर का उत्तरी किनारा बहुत कटा – फटा है।
  • लगभग सम्पूर्ण महासागर के भूमध्य के समीप होने के कारण ,
    विश्व के अन्य महासागरों की तुलना में हिन्द महासागर सबसे अधिक गर्म महासागर है।
  • हिन्द महासागर की औसत गहराई लगभग 3750 मी. है।
  • इस महासागर का सबसे गहरा भाग सुंडा गर्त है,इसकी गहराई लगभग 7725 मी. है।
    सुंडा गर्त इंडोनेशिया के जावा द्वीप के दक्षिण में स्थित है।
    इसे सुंडा ट्रेंच और जावा ट्रेंच के नाम से भी जाना जाता है।
  • हिन्द महासागर में स्थित अधिकांश द्वीप महाद्वीपीय खंडों से टूटकर बने हैं। इनमे इनमे अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, श्री लंका, मेडागासकर तथा जंजीबार इसके उदाहरण हैं।
  • “मेडागास्कर” हिन्द महासागर का सबसे बड़ा द्वीप है,
    इसके अलावा भारत के दक्षिण – पश्चिमी तट के पास स्थित लक्षद्वीप तथा मालद्वीव हिन्द महासागर में प्रवाल द्वीप के उदाहरण हैं।
  • मेडागास्कर के ही पूर्व में स्थित मॉरिशस तथा रीयूनियन द्वीप ज्वालामुखी प्रक्रिया से उत्पन्न द्वीप हैं।

दक्षिणध्रुवीय महासागर, दक्षिणी महासागर या अंटार्कटिक महासागर ( ANTARCTIC Ocean )

  • दक्षिणध्रुवीय महासागर को दक्षिणी महासागर या फिर अंटार्कटिक महासागर (ANTARCTIC  MAHASAGAR) के नाम से भी जाना जाता है,
    यह महासागर विश्व के सबसे दक्षिण भाग में स्थित है।
  • पांचो महासागरों में यह महासागर विश्व का चौथा सबसे बड़ा महासगार है ,परन्तु इस महासागर के अस्तित्व के संबंध में कुछ अपवाद भी हैं ,क्यूंकि इस महासागर को कुछ वैज्ञानिको द्वारा प्रशांत महासागर, दक्षिणी अटलांटिक महासागर या हिन्द महासागर का दक्षिणी हिस्सा माना जाता है
    इसके अलावा ,
    अंतरराष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन के द्वारा अभी तक 60° दक्षिणी अक्षांश के दक्षिण में उपस्थित महासागरों से संबंधित अपनी परिभाषा की पुष्टि नहीं की गई है।
    जबकि ऑस्ट्रेलिया के मतानुसार,
    दक्षिणध्रुवीय महासागर ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी सिरे के ठीक नीचे से शुरु हो जाता है।
  • अंटार्कटिक महासागर संपूर्ण अंटार्कटिका महाद्वीप को घेरे हुये है (उत्तर दिशा से)।
    अंटार्कटिक महासागर की हार्न अंतरीप के पास गहराई लगभग 900 किमी है,
    जबकि अफ्रीका के दक्षिण में स्थित अमुलहस अंतरीप के पास गहराई 3600 किमी है ।
  • पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव में स्थित होने के कारण अंटार्कटिक महासागर का अधिकाँश हिंसा बर्फ के रूप में है ,
    इस कारण इसमें अनेक प्लावी हिमशैल (आइसबर्ग) तैरते रहते हैं।
  • अंटार्कटिक महासागर के सतह पर औसत तापमान 29 .8 ° फारनहाइट है ,
    जबकि महासागर के तल पर यह तापमान 32 से 35 फारनहाइट तक होता है।
  • इस महासागरीय क्षेत्र में छोटे-छोटे पौधे, पक्षी तथा अन्य जीव-जंतु पाए जाते हैं।
    ह्वेल मछली के शिकार के लिए भी यह महासागर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और यहाँ से ह्वेल का भी काफी व्यापार होता है।

आर्कटिक महासागर :  ( Southern Ocean)

  • दुनिया के पाँचो महासागरों में आर्कटिक ( ARCTIC MAHASAGAR ) महासागर सबसे छोटा और सबसे उथला महासागर है।
    इस महासागर का अधिकांश भाग उत्तरी गोलार्द्ध के मध्य में स्थित उत्तर ध्रुवीय क्षेत्र में पड़ता है।
  • आर्कटिक महासागर का क्षेत्रफल लगभग अंटार्कटिका महाद्वीप के बराबर ही है, इसकी औसत गहराई 1,038 मीटर (3,406 फीट) है।
  • इस महासागर ( MAHASAGAR ) का सबसे गहरा भाग यूरेशियन बेसिन में स्थित लाइक डीप (Litke Deep) है,
    जिसकी गहराई 5,450 मीटर (17,880 फीट) है।
  • आर्कटिक महासागर चारों ओर से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका महाद्वीप तथा ग्रीनलैंड और अन्य कई द्वीपों से घिरा हुआ है।
    यह महासागर उत्तरी ध्रुव के चारों ओर फैला हुआ है जो कि दुनिया के सबसे अधिक ठंडे स्थानों में से एक है।
  • उत्तरी ध्रुव में होने के कारण यह महासागर लगभग पूरे वर्ष आंशिक रूप से बर्फ से जमा रहता है।
  • यह महासागर अन्य सभी महासागरों की तुलना में सबसे कम खारा है,
    क्योंकि यह दूसरे महासागरों से सीमित रूप से ही जुड़ा है।
  • आर्कटिक महासागर , बेरिंग स्ट्रेट के जरिये प्रशांत महासागर और ग्रीनलैंड तथा लैब्राडोर समुद्र के जरिये अटलांटिक महासागर से जुडा हुआ है।
  • इस महासागर के ऊपर पूरे वर्ष भर बादल और धुंध छाई रहती है।

 

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