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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (Right to Information ACT 2005)

सूचना का अधिकार (Right to information)

किसी भी लोकतान्त्रिक देश में लोकतंत्र को बनाये रखने के लिए समय -समय कानून बदले जाते है, या नए कानून बनाये जाते हैं

सूचना का अधिकार का कानून भी इसी तरह का एक कानून है जो आम नागरिक की सहभागिता को प्रशसनिक कार्यों में बढ़ाता है।

यह कानून आम नागरिकों को सरकार से सवाल करने का हक़ देता है
सरकार द्वारा इन्ही उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु , यह अधिनियम पारित किया गया था .

इस अधिनियम को सबसे पहले 11 ,मई 2005 को लोकसभा में पारित किया गया।

जिसके बाद इसे  12, मई 2005 को राज्य सभा में पारित किया गया।

अंततः  15 जून 2005 को इस अधिनियम को राष्ट्रपति द्वारा अनुमति प्रदान की  गयी।और यह कानून वास्तविक रूप से अस्तित्व में आया

RTI (Right to information) ACT – 2005 में कुल छः अध्याय , 31 धाराएँ , एवं 2 अनुसूचियाँ है

इस अधिनियम की धाराएं 4 (1 ), 5 (1 ), 5 (2 ), 12 , 13 , 15 , 16 , 24, 27, तथा 28 को 15 जून 2005 को लागू कर दिया गया


सूचना का अधिकार की आवश्यकता
REQUIREMENT OF RIGHT TO INFORMATION

सरकारी स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने में यह क़ानून एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ,इस  क़ानून का प्रयोग करके कोई भी व्यक्ति सरकारी दफ्तरों से किसी भी तरह की सूचना को प्राप्त कर सकता है.

भारत सरकार के लगभग सभी संवैधानिक पद इस कानून के अंतर्गत आते है, जिनसे सम्बंधित जानकारियाँ इस कानून के जरिये प्राप्त की जा सकती है.

इस कानून का प्रयोग करके कोई भी व्यक्ति किसी भी सरकारी संस्थान से जानकारी के लिए अपना आवेदन दे सकता है, जिसका जवाब उस सरकारी संस्थान को महज 30 दिनों के अन्दर देना होता है


सूचना के अधिकार के लाभ
Benefits of right to information

सूचना का अधिकार आम आदमी को कई तरह लाभ प्रदान करता है और व्यवस्था में पारदर्शिता को बढ़ाता है जिनमे कुछ लाभ इस प्रकार है –

1 – इस कानून के प्रयोग से कोई भी व्यक्ति विभिन्न सरकारी संस्थानों से कई तरह के तथ्यों से सम्बंधित जानकारी को प्राप्त कर सकता है

2 – यह कानून आम नागरिको के अधिकारों की रक्षा करता और उन्हें व्यवस्था से सवाल पूछने का हक़ देता है

3 – इस कानून के द्वारा कोई भी व्यक्ति वो सभी जानकारियां प्राप्त कर सकता है जो उसकी निजी जिंदगी से सम्बंधित हैं उदाहरण के तौर पर अपने प्रोविडेंट एंड फण्ड से सम्बंधित जानकारी, पासपोर्ट से सम्बंधित जानकारी,टैक्स रिफंड से सम्बंधित जानकारी, पेंशन से सम्बंधित जानकारी आदि कई तरह की जानकारिओं को प्राप्त कर सकता है


किन परिस्थितियों में सूचना के अधिकार का प्रयोग किया जा सकता है ?

1 -जब किसी सरकारी सेवा में देर हो : अक्सर सरकारी सेवाओ के आम लोगों तक पहुँचने में काफ़ी समय लगता है. इस देर की मुख्य वजहों में कर्मचारियों द्वारा किया जाने वाला भ्रष्टाचार होता है.

जैसे किसी भी व्यक्ति द्वारा पासपोर्ट बनाने या रीन्यु कराने में होने वाली देरी या और भी तरह के कई सरकारी काम जिनमे होने वाली देरी के कारण ,इस  कानून का प्रयोग करके अपना काम कर सकते हैं.

2 -संस्थानों की निष्क्रियता पर : किसी भी सरकारी संस्थान की निष्क्रियता पर भी इस कानून के सहारे सवाल उठाया जा सकता है .

इस सम्बन्ध में इस कानून के तहत किसी भी सरकारी संस्था से उसके डॉक्यूमेंट की कॉपी प्राप्त की जा सकती है , जिसकी सहायता से संस्थान के भ्रष्टाचार को सामने लाया जा सकता है .

3. अन्य विशेष जानकारियों में : इसका प्रयोग से ऐसे तथ्य भी प्राप्त किये जा सकते हैं,जिनका उपयोग अदालत में दलील के तौर पर किया जा सके

जिससे किसी घटना में कितने लोगों की मृत्यु हुई अथवा किसी सरकारी कार्यक्रम में कितना खर्च हुआ, ये सब जानकारिया प्राप्त की जा सकती हैं।


सूचना का अधिकार सम्बंधित आवश्यक नियम
(Right to Information Rules)

सूचना का अधिकार के तहत आवेदन जमा करने से पहले कुछ विशेष बातों को ध्यान रखना आवश्यक है.

कोई भी व्यक्ति जो भारतीय नागरिक है , इसके अंतर्गत अपना आवेदन जमा कर सकता है. और इस कानून के प्रयोग से किसी भी सरकारी दफ्तर से आवश्यक जानकारियाँ हासिल की जा सकती है .

सूचना का अधिकार – 2005 के अंतर्गत किसी भी पब्लिक अथॉरिटी से सूचना प्राप्त की जा सकती है . पब्लिक अथॉरिटी के अंतर्गत सभी केन्द्रीय, राज्य और स्थानीय संस्थान आते हैं, जिनकी स्थापना संविधान के अंतर्गत हुई है.

जो संस्थान केंद्र और राज्य दोनों की सहभागिता से चलते हैं, उन संस्थानों में भी आवेदन दिया जा सकता है.

इस कानून से कुछ संस्थानों को अलग भी रखा गया है.
सूचना का अधिकार के सेक्शन 24(1) के अंतर्गत सिक्यूरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसी को सूचना का अधिकार से बाहर रखा गया है.

सूचना का अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए , आवेदन मेंएकदम सटीक जानकारी के साथ सरकारी संस्था का नाम जमा करना पड़ता है, जहाँ से आवेदक को जरूरी जानकारियाँ हासिल करनी हों.

इसके साथ ही आवेदक को आवेदन का शुल्क भी भेजना होता है.

यदि आवेदक गरीबी रेखा से नीचे का हो तो उसे बिना किसी शुल्क के आवेदन को जमा कर सकता है ,हालाँकि गरीबी रेखा के नीचे के आवेदक को अपने आवेदन के साथ अपनी जाति प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता होती है.

एक बार आवेदन भेजने के बाद आवेदक को 30 दिनों के अन्दर आवेदन का उत्तर प्राप्त हो जाता है.परन्तु यदि अतिआवश्यक डॉक्यूमेंट हों, तो 48 घंटे के भीतर भी जानकारी प्राप्त की जा सकता है.

कई कारणों में सूचना का अधिकार के तहत किया गया आवेदन रिजेक्ट भी हो जाता है. यदि आवेदक ने अपने आवेदन में बातें सही से न भरी हों अथवा किसी भी तरह की डिटेल अधूरी हो, तो आवेदन रिजेक्ट किये जा सकते हैं.

यदि आवेदन की राशि गलत दी गयी तो भी यह आवेदन रिजेक्ट हो सकता है.

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