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Uttarakhand ka Bhugol : उत्तराखंड का भूगोल ( Geography of Uttarakhand )

Uttarakhand ka Bhugol 

Uttarakhand ka Bhugol 

Uttarakhand ka Bhugol

9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का गठन उत्तरप्रदेश राज्य से अलग करके किया गया,
गठन के पश्चात उत्तराखंड देश का 27 वां जबकि, 11 वां हिमालयी राज्य बना।
Note- वर्तमान में भारत की संसद द्वारा 31,अक्टूबर 2019 को जम्मूकश्मीर राज्य को दो केन्द्रशसित प्रदेशों जम्मू – कश्मीर और लद्दाख में बदलने के बाद उत्तराखंड अब देश का 26 वा और हिमालयी क्षेत्र का 10 वा राज्य बन गया है।

भौगोलिक रूप से उत्तराखंड का जहाँ अधिकांश भाग पर्वतीय है, परन्तु इसका कुछ भाग तराई अर्थात मैदानी भी है।
भारत के उत्तरी मैदान को आकार देने वाली व कृषि के लिए उपजाऊ भूमि का निर्माण करने वाली नदियों का उद्गम श्रोत भी उत्तराखंड का पर्वतीय भाग है।
इन्ही कारणों से उत्तराखंड के भूगोल ( Uttarakhand ka Bhugol ) का अध्ययन हमारे लिए महत्वपूर्ण हो जाता है ,
तो दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम उत्तराखंड के भूगोल  ( Uttarakhand ka Bhugol ) का समग्र रूप से अध्ययन करेंगे।

उत्तराखंड का भौगोलिक विस्तार व सरंचना
Uttarakhand ka Bhaugolik vistar aur Sanrachana

उत्तराखंड राज्य वृहत हिमालयी क्षेत्र व गंगा के मैदानी क्षेत्र के मध्य में है,
इसका आकार आयताकार है।
जिसका की कुल क्षेत्रफल 53, 484 वर्ग किमी है।

भौगोलिक रूप से उत्तराखंड का पूर्वोत्तर भाग तिब्बत के साथ सीमा बनता है
इसके उत्तर -पश्चिमी भाग में हिमांचल प्रदेश , दक्षिण – पश्चिम भाग में उत्तर प्रदेश और दक्षिण – पूर्व में नेपाल देश स्थित है।

उत्तराखंड राज्य का अक्षांशीय विस्तार

उत्तराखण्ड राज्य अक्षांशीय रूप से 28º43‘ उत्तरी अक्षांश से 31º27‘ उत्तरी अक्षांश तक फैला है अर्थात इसका अक्षांशीय विस्तार 2º44 है।

उत्तराखंड राज्य का देशांतरीय विस्तार

उत्तराखंड राज्य का देशांतरीय विस्तार 77º34′ पूर्वी देशांतर (East longitude)  से 81º02′ पूर्वी देशांतर (East longitude) तक है ,
अर्थात उत्तराखंड का देशांतरीय (longitude) विस्तार 3º28‘ है।

पूर्व से पश्चिम तक उत्तराखंड राज्य की लंबाई- 358 Km है, जबकि

राज्य का कुल क्षेत्रफल – 53,483 वर्ग किमी

कुल क्षेत्रफल का 86.07% (46035 वर्ग किमी) भाग पर्वतीय है, जबकि 13.93% (7448 वर्ग किमी) भाग मैदानीय है।

इस प्रकार उत्तराखंड राज्य का क्षेत्रफ़ल भारत के कुल क्षेत्रफल का 1.69% है, तथा यह क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का 18वां राज्य है।

Note तेलंगाना राज्य के बनने से पहले उत्तराखंड क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का 18 वां राज्य था,
परन्तु जब साल 2014 में तेलंगाना राज्य बना तो उत्तराखंड क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का 19वां राज्य बना।
परन्तु वर्तमान में जम्मू कश्मीर राज्य के केंद्र शासित प्रदेश बनने पर उत्तराखंड राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से फिर से भारत का 18 वां राज्य बन गया।


उत्तराखंड (Uttarakhand)  राज्य के सभी जिलों का क्रमवार क्षेत्रफल-

1. चमोली – 8030 वर्ग किमी
2. उत्तरकाशी – 8016 वर्ग किमी
3. पिथौरागढ़ – 7110 वर्ग किमी
4. पौड़ी गढ़वाल – 5329 वर्ग किमी
5. टिहरी गढ़वाल – 4080 वर्ग किमी
6. नैनीताल – 3860 वर्ग किमी
7. देहरादून – 3088 वर्ग किमी
8. अल्मोड़ा – 3082 वर्ग किमी
9. उधम सिंह नगर – 2542 वर्ग किमी
10. हरिद्वार – 2360 वर्ग किमी
11. बागेश्वर – 2302 वर्ग किमी
12. रुद्रप्रयाग – 1984 वर्ग किमी
13. चंपावत – 1766 वर्ग किमी

क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तराखंड राज्य का सबसे बड़ा जिला –
चमोली (8030 वर्ग किमी)

क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तराखंड राज्य में सबसे छोटा जिला –
चंपावत(1766 वर्ग किमी)

उत्तराखंड ( Uttarakhand  )राज्य की अन्य राज्यों के साथ सीमाएं

उत्तराखंड राज्य की दो राज्यों के साथ सीमा लगाती है –
1 – हिमाचल प्रदेश ( पश्चिमी सीमा )
२ – उत्तर प्रदेश ( दक्षिणी सीमा )

हिमाचल प्रदेश के साथ राज्य के उत्तरकाशी तथा देहरादून जिले सीमा हैं।
उत्तरप्रदेश के साथ राज्य के पांच जिले ( देहरादून, हरिद्वार,पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल व उधमसिंहनगर ) सीमा बनाते हैं।

राज्य का सबसे पूर्वी जिला पिथौरागढ़ है जबकि पश्चिमी जिला देहरादून है।
राज्य का सबसे उत्तरी जिला उत्तरकाशी है , जबकि सबसे दक्षिणी जिला उधमसिंहनगर है ,

उत्तराखंड राज्य का पौड़ी जिला राज्य के ही सर्वाधिक 7 जिलों ( हरिद्वार, देहरादून,टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा व नैनीताल ) के साथ सीमा बनता है।

राज्य के चार जिले ( टिहरी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, अल्मोड़ा ) पूर्णतया आंतरिक जिले हैं जबकि,
पिथौरागढ़ जिला सबसे अधिक लम्बाई की अंतराष्ट्रीय सीमा बनाता है


उत्तराखंड ( Uttarakhand ) राज्य की अंतराष्ट्रीय सीमाएं-

उत्तराखंड राज्य की अंतराष्ट्रीय सीमा की कुल लम्बाई 625 किमी है।
इसकी पूर्वी सीमा नेपाल से जबकि उत्तरी सीमा चीन ( तिब्बत ) से मिलती है।
चीन के साथ उत्तराखंड राज्य की अंतराष्ट्रीय सीमा की लम्बाई 350 किमी है,
जबकि नेपाल के साथ उत्तराखंड की अंतराष्ट्रीय सीमा की लंबाई 275 किमी है।

राज्य के तीन जिले ( उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ ) चीन देश के साथ सीमा बनाते है जबकि तीन जिले ( पिथौरागढ़, चम्पावत तथा ऊधम सिंग नगर ) नेपाल के साथ सीमा बनाते हैं। इस प्रकार राज्य के कुल पांच जिलों की सीमा अन्य देशों के साथ लगती है।

इसके अलावा उत्तर में स्थित वृहत हिमालयी क्षेत्र व पूर्व में काली नदी राज्य की प्राकर्तिक सीमा बनाने का काम करती है।

( Uttarakhand ka Bhugol )

उत्तराखंड का भौगोलिक विभाजन
Uttarakhand ka Bhaugolik Vibhajan

उत्तराखंड राज्य की स्थिति व संरचना के आधार से आठ प्रकार के भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है,
ये आठ भौगोलिक क्षेत्र हैं –

1- ट्रांस हिमालयी क्षेत्र
2- वृहत या उच्च हिमालयी क्षेत्र
3- लघु या मध्य हिमालय क्षेत्र
4- दून(द्वार) क्षेत्र
5- शिवालिक क्षेत्र
6- भाबर क्षेत्र
7- तराई क्षेत्र
8- गंगा का मैदानी क्षेत्र

1- ट्रांस हिमालयी क्षेत्र ( Trans – Himalaya )

  • ट्रांस हिमालय अथवा पार हिमलाय वह भाग जिसका निर्माण हिमालय के बनने से पहले हुआ था।
    ट्रांस हिमालय में ट्रांस शब्द का अर्थ है – के पार , अर्थात ‘ हिमालय के पार स्थित भू – भाग ‘ इसलिए इसे पार हिमालय भी बोला जाता है
  • इसका कुछ भाग उत्तराखंड में तथा कुछ तिब्बत ( चीन ) में स्थित है |
  • इस क्षेत्र की कुल चौड़ाई लगभग 20 से 30 किमी है,जबकि
  • इस क्षेत्र की औसत ऊंचाई- 2500 मीटर -3500 मीटर है
    ट्रांस हिमालयी क्षेत्र की पर्वत श्रेणियों को” जैंक्सर श्रेणी” कहा जाता है।
  • ट्रांस हिमालय व महान हिमालय को विभाजित करती हुई, बीच से एक फाल्ट लाइन गुजरती है जिसे “इंडो सांगको भ्रंश” कहा जाता है ।
  • इस हिमालयी क्षेत्र में मुख्य रूप से राज्य के तीन जिले आते है –
    चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी।
  • उत्तराखंड के ज्यादातर माणा , नीति , लिपुलेख , किंगरी -बिंगरी आदि दर्रे इसी क्षेत्र में स्थित हैं।

2-वृहत या उच्च हिमालयी क्षेत्र या मुख्य हिमालय क्षेत्र ( Great Himalaya )

  • वृहत या उच्च हिमालय क्षेत्र मध्य या लघु हिमालय के उत्तर में तथा ट्रांस हिमालय के दक्षिण में स्थित है।
    इस हिमालयी क्षेत्र में दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियाँ पाई जाती हैं इस वजह से इसे महान हिमालय भी कहा जाता है।
  • इसकी कुल चौड़ाई 15 से 30 किमी है ,
    जबकि इस क्षेत्र के पर्वतों की औसतन ऊंचाई 6000 मीटर से 7000 मीटर तक है।
  • इस क्षेत्र की सबसे ऊंची पर्वत श्रखंला नन्दादेवी पश्चिमी है, जिसकी ऊंचाई 7817 मीटर है ,
  • यह क्षेत्र उत्तराखंड राज्य के छः जिलों में फैला हुआ है,
    ये जिले हैं –
    उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी,रुद्रप्रयाग, बागेश्वर व पिथोरागढ़।
  • विशाल हिमनद ( ग्लेशियर ) इसी क्षेत्र की पर्वत श्रेणियों में मिलते है जिनमे गंगोत्री, पिंडारी, मिलम ग्लेशियर प्रमुख हैं।
    विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी इसी क्षेत्र में हैं।
  • Main central thrust ( MCP मुख्य केंद्रीय भ्रंश ) फॉल्ट लाइन वृहत हिमालय को लघु हिमालय को अलग करती है.

वृहत या उच्च हिमालयी क्षेत्र के उत्तराखंड राज्य में प्रमुख पर्वत शिखर-

उत्तरकाशी जिले में स्थित प्रमुख पर्वत शिखर-
The major mountain peaks located in Uttarkashi district-

भागीरथी पर्वत शिखर ( 6856 ), श्रीकंठ पर्वत शिखर ( 6728 ),
गंगोत्री पर्वत शिखर ( 6672 ), यमुनोत्री पर्वत शिखर ( 6400 ),
बंदरपूंछ पर्वत शिखर ( 6320 )

चमोली जिले में स्थित प्रमुख पर्वत शिखर-
The major mountain peaks located in Chamoli district-

नन्दादेवी पर्वत ( 7,817 ), कामेट पर्वत ( 7756 ), माणा पर्वत ( 7,272 ), बद्रिनाथ पर्वत ( 7,140 ), चौखम्बा पर्वत (7,138 ), त्रिशूल पर्वत ( 7,120 ), संतोपथ पर्वत ( 7,084 ), द्रोणागिरी पर्वत ( 7066 ), देवस्थान पर्वत ( 6,678 ), नन्दाखाट पर्वत ( 6674 ), नीलकंठ पर्वत ( 6597 ), गौरी पर्वत ( 6250 ), नारायण पर्वत ( 5965 ), नरपर्वत ( 5831) , जैलंग पर्वत ( 5871 )

चमोली-उत्तरकाशी में स्थित पर्वत शिखर-
The mountain peak located in Chamoli-Uttarkashi

केदारनाथ पर्वत शिखर ( 6968 )
स्वर्गारोहनी पर्वत शिखर ( 6252 )

चमोली व पिथौरागढ़ में स्थित पर्वत शिखर-
The mountain peaks located in Chamoli and Pithoragarh-

नन्दादेवी पूर्वी पर्वत शिखर( 7434 )
नंदाकोट पर्वत शिखर ( 6861 )
गुन्नी पर्वत शिखर ( 6180 )


लघु या मध्य हिमालयी क्षेत्र 

महान हिमालय अथवा वृहत ( उच्च ) हिमालय के दक्षिण में तथा स्थित दून क्षेत्र के उत्तर में स्थित हिमालयी क्षेत्र लघु या मध्य हिमालयी क्षेत्र कहलाता है।

  • यह हिमालयी क्षेत्र उत्तराखंड राज्य के नौ जिलों में फैला है , ये जिले हैं –
    देहरादून, उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनिताल, अल्मोड़ा और चम्पावत।
    इस हिमालय क्षेत्र की चौड़ाई लगभग 70 से 100 km तक है,
    जबकि इसकी औसतन ऊंचाई करीब 1200 से 4500 मीटर है।
  • इस क्षेत्र के पर्वत शिखर आशिंक रूप से हिमाच्छादित रहते हैं, जिस वजह से इस क्षेत्र को हिमंचल या हिम का आंचल भी कहा जाता है।
    Maine boundary thrust ( MBT मुख्य सीमा भ्रंश ) नाम की फाल्ट लाइन
    लघु हिमालय और शिवालिक क्षेत्र अलग करती है।
  • कुछ प्रमुख नदियों, जैसे – सरयू, रामगंगा, लधिया, नयार आदि का यह क्षेत्र उद्गम स्थल है ।
  • मध्य हिमालयी क्षेत्र का निर्माण वलित और कायांतरित चट्टानों से हुआ है, इसलिए
    इस क्षेत्र में तांबा, ग्रेफाइट, जिप्सम, मैग्नेसाइट आदि खनिज भी पाये जाते हैं।
  • मध्य हिमालयी श्रेणी के दक्षिणी भाग में अनेक ताल पाये जाते हैं, जैसे –
    नौकुचियाताल , भीमताल, सातताल, खुरपाताल, सातताल ,पूनाताल,आदि।
  • मध्य हिमालयी क्षेत्र के ही पर्वत श्रेणियों की ढालों पर छोटे-छोटे घास के मैदान पाये जाते हैं इस घास के मैदानों को स्थानीय भाषा में, “बुग्याल व पयार”कहा जाता है।
  • इस हिमालयी क्षेत्र में शीतोष्ण कटिबंधीय सदाबहार प्रकार के कोण धारी वन पाए जाते हैं,जिनमें चीड़, फर, देवदार, साल, प्रमुख हैं।
  • इसकी घाटियों में मुख्य तौर पर – धान, ज्वार, मक्का, गेंहू आदि की खेती की जाती है।
  • इस क्षेत्र का लगभग 45 से 60 % के करीब का भाग वनाच्छादित है।

मध्य हिमालय क्षेत्र में प्रमुख पर्वत शिखर और हिल स्टेशन है –

जैसे –
द्रोणागिरी – चमोली, सुरकण्डा – टिहरी, चंद्रबदनी – टिहरी, रानीखेत – अल्मोड़ा
लालटिब्बा- मसूरी, देववन – देहरादून(चकराता), दूधातोली – चमोली,
पौड़ी और अल्मोड़ा ये सभी इसी हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

चमोली, पौड़ी व अल्मोड़ा जिलों में फैली दूधातोली श्रखंला इसी हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत आती है , दूधातोली शृंखला को उत्तराखंड का पामीर कहा जाता है।

इसी श्रखंला में कोदियाबगड़ जगह है ,
जहाँ पर वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की समाधि स्थल स्थित है जहाँ पर हर साल 12 जून को उनकी याद में मेले का आयोजन किया जाता है।


4. दून या द्वार क्षेत्र-( Doon – Dwar )

  • यह क्षेत्र मध्य हिमालय क्षेत्र और शिवालिक क्षेत्र के बीच में स्थित है। है इस क्षेत्र में कई ऊंची घाटियां व पहाड़ियां इस क्षेत्र में पाई जाती हैं।
  • इस क्षेत्र की औसतन चौड़ाई करीब 24 से 3।2 किमी है, जबकि औसत ऊंचाई 350 मीटर से 750 मीटर है।
  • इस क्षेत्र का पश्चिम भाग को “दून” कहलाता है, जबकि इसके पूर्वी भाग को “द्वार” कहा जाता है।
  • दून या द्वार क्षेत्रों में गहन कृषि की जाती है , जिसके अंतर्गत मुख्य रूप से इस क्षेत्र में धान की फसल सबसे अच्छी होती है।
  • मानव जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां होने के कारण इस क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व अधिक पाया जाता है।
  • इस क्षेत्र कई प्रमुख क्षेत्र जैसे – देहरादून, कोठारी व चोखम(पौड़ी) ,कोटा(नैनीताल) आदि आते हैं

5.शिवालिक क्षेत्र ( Shivalik )

  • शिवालिक क्षेत्र हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है,
    इस वजह से इस क्षेत्र को बाह्य हिमालय या हिमालय का पाद भी कहा जाता है
  • शिवालिक क्षेत्र की चौड़ाई 10 से 50 किमी है , जबकि
  • इस क्षेत्र में स्थित पर्वत चोटियों की औसत ऊंचाई 700 मीटर से 1200 मीटर है।
    ( HFF-himalayan frunt galt ) नाम की फाल्ट लाइन शिवालिक क्षेत्र को भाबर क्षेत्र से अलग करती है। इस फाल्ट लाइन को हिमालयन अगर सीमा भी कहा जाता है।
  • शिवालिक क्षेत्र हिमालय का सबसे नवीन भाग है, जिसका निर्माण 1.75 लाख से 3 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ था। इसका निर्माणकाल मायोसीन युग से प्लाइस्टोसीन युग तक माना जाता है ।
  • हिमालय की सबसे नवीन श्रेणी होने के कारण इस श्रेणी में जीवाश्म पाए जाते हैं।
  • उत्तराखंड राज्य के अधिकांश पर्यटन केंद्र इसी श्रेणी में स्थित हैं।
  • उत्तराखंड राज्य के सात जिलों में यह श्रेणी फैली हुई है ,
    इन जिलों में , – दक्षिणी देहरादून, दक्षिण- उतरी हरिद्वार, दक्षिण टिहरी, मध्यवर्ती पौड़ी, दक्षिण अल्मोड़ा, मध्यवर्ती नैनीताल व दक्षिण चम्पावत क्षेत्र आते हैं ।

6.भाबर क्षेत्र ( Bhabar )

  • तराई क्षेत्र का उत्तरी व शिवालिक क्षेत्र का दक्षिणी भाग भाबर कहलाता है।
  • यह क्षेत्र की चौड़ाई- 10 से 12 किमी की चौड़ाई में फैला है।
  • इस क्षेत्र में भूमि काफी उबड़-खाबड़ व मोटे-मोटे कंकड़, मिट्टी बालू युक्त है। इसलिए कृषि के लिये इस क्षेत्र में उपयुक्त दशाएं नहीं मिलती।
  • यह क्षेत्र पूर्व में चम्पावत से दक्षिण में देहरादून तक विस्तृत्त है।

 

7.तराई क्षेत्र ( Tarai )

  • इस क्षेत्र का निर्माण हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा लाये गये महीन कणों वाली अवसादों से बन हुआ है, परन्तु अत्यधिक वर्षा होने के कारण यह भूमि ढलान(तराई) व दलदली है।
  • हरिद्वार में गंगा के मैदानी क्षेत्र के उत्तर में व पौड़ी गढ़वाल तथा नैनीताल जिलों के दक्षिण क्षेत्र व उ०सि०नगर जिले के अधिकांश क्षेत्र को तराई क्षेत्र कहा जाता है।
  • यह क्षेत्र 20 से 30 किमी की चौड़ाई में फैला है।
  • इस क्षेत्र में भूमि दलदलीय होने के कारण और अत्यधित पानी होने के कारण धान और गन्ने की फसलों की अच्छी खेती होती है ,
  • पातालतोड़ कुएँ भी इसी क्षेत्र में पाये जाते हैं।

8.गंगा का मैदानी क्षेत्र ( Ganga plain )

  • तराई क्षेत्र के दक्षिण में , यह क्षेत्र गंगा के समतल मैदानी क्षेत्र का हिस्सा है।
  • इस क्षेत्र का निर्माण गंगा व आदि नदियों द्वारा प्रवाह में लाये गये महीन छोटे-छोटे कणों वाले अवसाद(मिट्टी, कीचड़ तथा बालू) से हुआ है।
  • दो प्रकार की इस क्षेत्र में मिट्टी पायी जाती है-
    1.बांगर- पुरानी जलोढ़ मिट्टी
    2.खादर-नवीन जलोढ़ मिट्टी
  • इस क्षेत्र में होने वाली फसलें- धान,गेंहू,गन्ना आदि
    दक्षिणी हरिद्वार का अधिकांश भाग,लक्सर,रुड़की आदि क्षेत्र गंगा के मैदानी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

Uttarakhand ka Bhugol

Uttarakhand ka Bhugol

 

उत्तराखंड के प्रमुख दर्रे Uttrakhand ke pramukh Darre : Hindlogy

उत्तराखंड के प्रमुख ग्लेशियर – Uttrakhand ke pramukh Glacier

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