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वायुमंडल ( Vayumandal ) : Atmosphere, वायुमंडल की परतें (Layers of the atmosphere): Hindlogy

VAYUMANDAL

वायुमंडल की परतें : VAYUMANDAL KI PARATE

 

VAYUMANDAL

वायुमंडल ( Vayumandal )
Atmosphere

पृथ्वी चारों और से एक गैसीय आवरण से ढकी हुई है।
यह गैसीय आवरण पृथ्वी के लिए एक कंबल की तरह काम करता है।
इस गैसीय आवरण को ही वायुमंडल कहते है।
पृथ्वी पर जीवन की दशाओं को पूरा करता हुआ वायुमंडल अनेक महत्वपूर्ण गैसों का मिश्रण हैं,
जो पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण पृथ्वी के साथ जुड़ा हुआ है |

सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को वायुमंडल अवशोषित कर लेता है
ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण दिन व रात के तापमान को संतुलित रखकर वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करता है|


वायुमंडल ( Vayumandal ) का संघटन
Composition of the atmosphere

वायुमंडल ( Vayumandal ) का संघटन कई महत्वपूर्ण गैसों का मिश्रण हैं
इन गैसों में ,
नाइट्रोजन ( Nitrogen) 78.09%
ऑक्सीजन ( Oxygen ) 20.95%,
ऑर्गन ( Argon ) 0.93 %
कार्बन डाई ऑक्साइड (Carbon di oxide) 0.03 %
के अलावा हिलियम ,हाइड्रोजन और ओजोनआदि गैसें होती हैं

इन गैसों के अलावा ,
वायुमण्डल ( Vayumandal ) में जलवाष्प की मात्रा 3% से 5% तक होती है,
जिसकी प्राप्ति मुख्य रूप से महासागरों, जलाशयों आदि के वाष्पीकरण से होती है।
जलवाष्प की मात्रा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर घटती जाती है।
जल वाष्प के कारण ही बादल, कोहरा, पाला, वर्षा, ओस, हिम, ओला, हिमपात होता है।
वायुमण्डल ( Vayumandal ) में ओजोन परत सूर्य से आने वाली मानव जीवन के लिए हानिकारक पराबैंगनी किरणों की 93-99% मात्रा को अवशोषित कर पृथ्वी सतह तक आने से रोक लेती है |
ओजोन की परत की खोज 1913 में फ़्राँस के भौतिकविज्ञानी फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी .

इन सब के अलावा वायुमंडल ( Vayumandal ) में धूल के कण, खनिज के कण, परागकण,ज्वालामुखी राख आदि अन्य तत्त्व भी पाये जाते हैं | इन कणो को ‘ऐरोसोल’ कहा जाता है।
एरोसोल बादलों के बनने में सहायक होते है,
पृथ्वी पर उपस्थित जलराशियों से निकली जलवाष्प इन्ही एरोसोल के ऊपर संघनित होकर बादलो का निर्माण करती हैं
इन कणो के अभाव में बादलों का निर्माण नहीं हो सकता है | इसीलिए इनको ‘आर्द्रताग्राही नाभिक’ ‘hygienic nucleus’ भी कहा जाता है |


पृथ्वी के वायुमण्डल  की संरचना
Earth’s Atmosphere Structure

वायुमंडल की परतें

पृथ्वी के वायुमण्डल ( Vayumandal ) पाँच परतों में बाँटा गया है-

  • क्षोभमण्डल (Troposphere)
  • समतापमण्डल (Stratosphere)
  • मध्यमण्डल (Mesosphere)
  • तापमण्डल (Thermosphere)
  • बाह्यमण्डल (Exosphere)

क्षोभमण्डल (Troposphere)

ट्रोपोस्फीयर या विक्षोभ प्रदेश इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम तिज्रांस-डि-बोर ने किया

क्षोभमण्डल वायुमण्डल की सबसे निचली परत है,

इस परत की ऊँचाई ध्रुवों पर लगभग 8 किमी. और भूमध्यरेखा पर लगभग 18 किमी. होती है।

सभी प्रकार की वायुमंडलीय व मौसमी घटनाएँ ,इसी मण्डल में होती हैं,इसलिए इस मंडल को परिवर्तन मंडल भी कहते हैं.

सम्पूर्ण वायुमण्डल का लगभग 80% द्रव्यमान इसी मण्डल में उपस्थित है| ,जिसमे से लगभग 50% द्रव्यमान तो 5.6 किमी. की ऊँचाई तक ही होता है , जो की मुख्यतः नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और कुछ अन्य गैसों से मिलकर बना है

वायुमंडल ( Vayumandal ) की में उपस्थित सम्पूर्ण जलवाष्प इसी क्षोभमंडल में पायी जाती है, जलवाष्प होने के कारण ही यहाँ पर मौसमी घटनाएँ होती हैं |

क्षोभमंडल में नीचे से ऊपर जाने पर 6.5 डिग्री सेंटीग्रेट / किमी. (प्रति 165 मी. की ऊँचाई पर तापमान में 1 डीग्री सेल्सियस की गिरावट ) की दर से तापमान घटता जाता है|
इस मंडल की ऊपरी सीमा को क्षोभ सीमा (Tropopause) कहा जाता है |

क्षोभ सीमा (Tropopause)

क्षोभ मंडल और समताप मंडल को अलग करनेवाली 1.5 कि.मी. मोटे संक्रमण को ट्रोपोपॉज या क्षोभ सीमा कहा जाता है I
इसमें ऊँचाई के साथ तापमान का गिरना बंद हो जाता है I


समतापमण्डल (Stratosphere)

समतापमंडल, वायुमण्डल की दूसरी सबसे निचली परत है,

इस मंडल की ऊँचाई लगभग 12 से 50 किमी. होती है |

महत्वपूर्ण गैस ओज़ोन, ओज़ोन परत में मिलती है जो की समताप मण्डल की ऊपरी सीमा पर ही पायी जाती है,

ओजोन गैस हानिकारक पराबैंगनी किरणों का अवशोषण कर लेती है और उन्हें पृथ्वी तक पहुंचने से रोकती है |

तापमान इस मंडल में लगभग समान रहता है इसी वजह से इसे समतापमंडल कहा जाता है ,
परन्तु ओजोन गैस की उपस्थिति होने के कारण ऊंचाई बढ़ने पर तापमान बढ़ने लगता है क्योंकि ओजोन गैस सूर्य की पराबैगनी किरणों का अवशोषण कर इस भाग को गर्म कर देती है।

क्षोभमंडल की तरह इस मंडल में वायुमण्डलीय या मौसमी घटनाएँ इस मण्डल में नहीं होती हैं|

कभी कभी इस मंडल में विशेष प्रकार के मेघो का निर्माण होता है, जिन्हें मूलाभ मेघ (Mother of pearl cloud) कहते है।

समताप सीमा (Stratopause) समतापमंडल की सबसे ऊपरी सीमा को कहते है |

वायुयान आदि की उड़ान के लिए समताप मंडल सर्वाधिक उपयुक्त होता है |

ओजोनमण्डल 

इस मंडल का कुछ भाग समतापमंडल व कुछ भाग मध्य मंडल में स्थित है

इस मंडल में ऊँचाई बढ़ने के साथ- साथ तापमान बढ़ता जाता है, प्रति 1 km की ऊँचाई पर तापमान में 5℃ की वृद्धि होती है।

ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैस क्लोरो -फ्लोरो – कार्बन (Chloro-floro-carbon) है, जो एयर कंडिशनर, रेफ्रिजरेटर आदि से निकलती है।इस परत में क्षरण CFC में उपस्थित सक्रीय क्लोरीन (Cl) के कारण होती है।

ओजोन परत की मोटाई को नापने में डाबसन इकाई का प्रयोग किया जाता है।


मध्यमण्डल (Mesosphere)

मध्यमंडल वायुमण्डल की तीसरी सबसे निचली और समतापमण्डल के ऊपर स्थित परत है, ओजोन मंडल में उपस्थित ओजोन का कुछ भाग इस मंडल में भी पाया जाता है।
इस मंडल की ऊँचाई लगभग 50 से 80 किमी. होती है |
मध्यमण्डल की सबसे ऊपरी सीमा पृथ्वी का सबसे ठंडा स्थान है, यहाँ का औसत तापमान लगभग −85°C होता है |
अन्तरिक्ष से पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करने वाले लगभग सभी प्रकट के उल्कापिंड इस परत आकर जल जाते हैं।


तापमण्डल (Thermosphere)

तापमण्डल , मध्यमण्डल के ऊपर स्थित एक परत है,
इस मंडल की ऊँचाई लगभग 80 से 700 किमी. तक होती है |
इस मंडल में नीचे से ऊपर की ओर जाने पर तापमान में बढ़ोतरी होती जाती है|
इसकी सबसे ऊपरी सीमा को तापसीमा (Thermopause) कहते है |

तापमंडल में ही स्थित निचली परत (80 – 550 किमी.) को आयनमण्डल कहते है
क्योंकि यह परत सूर्य से आने वाले विकिरण के द्वारा आयनीकृत (Ionized) हो जाती है |

आयनमंडल में पूरी तरह से बादल व जलवाष्प का अभाव होता है |

आयनमंडल से रेडियो तरंगो का परावर्तन हो जाता है ये रेडियो तरंगे इसी मंडल से परावर्तित होकर वापस पृथ्वी की ओर लौटती हैं जिससे रेडियो,टेलीवीजन आदि का संचार संभव हो पता है हैं |

आयन मंडल की सबसे नीचे स्तिथ लेयर D-Layer से long radio waves और,
E1, E2 और F1, F2 परतो से short radio wave परावर्तन होता है।
संचार उपग्रह अयनमंडल में ही स्थित होते हैं |
इसी मण्डल में उत्तरी ध्रुव पर उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश (aurora borealis)
दक्षिणी ध्रुव पर दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश (aurora australis) की घटनाएँ घटित होती हैं |


बाह्यमण्डल (Exosphere)

यह तापमण्डल के ऊपर स्थित परत है,
बाह्यमण्डल की औसत ऊंचाई लगभग 700 से 10,000 किमी. तक है |
यह वायु मण्डल की सबसे ऊपरी परत है, जो की अंततः अन्तरिक्ष में जाकर मिल जाती है।
इसलिए इस मंडल की कोई निर्धारित सीमा नहीं है।
इस मंडल का घनत्व अन्य परतों से काफी काम होता है ,जिस वजह से इस परत पर हलकी गैसें पाई जाती हैं।
इन हल्की गैसों में हाइड्रोजन व हीलियम गैस की प्रधानता है|

 

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